मुस्लिम ने जलाया

मंदिर में जो एक दीया

सुना है खूदा का वो गुनहगार हो गया

बनने चला था इंसा

दिल से दिल मिलाकर

ढोंगी मौलवियों के हाथों

शिकार हो गया

दिल से दिल मिला जो ईद पर रहीम से

लगा धर्म इंसानियत का महान हो गया

टोपी देखते ही रहीम की

सर पे श्याम के

फिर से शहर में मेरे बवाल हो गया

नाराज है खुदा क्या मेरे राम से

या राम मेरा खुदा से परेशान हो गया

मंदिर था बहुत शांत

मस्जिद खामोश थी

फिर इंसा क्यूं आज का हैवान हो गया

क्यूं धर्मों की ऐसी दशा हो गई

इंसानियत जैसे कोई बला हो गई

धर्म आज एक व्यापार बन गया

पाखंड का जैसे बाजार सज़ गया

हर तरफ अजीब एक लूट सी मची है

जिसको देखो वो

अल्हा और राम का मैनेजर बना है

धर्म के नाम पर इंसा ने

इंसा को ठगा है

मुस्लिम ने जलाया जो मन्दिर में एक दीया

सुना है अल्हा का गुनहगार हो गया

बनने चला था इंसा

दिल से दिल मिलाकर

ढोंगी मौलवियों के हाथों शिकार हो गया ।

डाँ.विनोद कुमार