मुझे नहीं चाहिए
धन दौलत
ना महंगे वस्त्र
खिलौने भैया के
सांस ले पाऊं मैं भी मां
बस छोटा सा आंचल देना
ना बनना चाहूं लक्ष्मी और दुर्गा
बस बेटो के जैसे मुझको तू माँ
कलम किताब दिला देना
मुझे नहीं चाहिए मंदिर मस्जिद
बस मुझे विधालय दिखा देना
बेटी हूँ चट्टान चीरकर
पहचान अपनी बना लूंगी
बंजर से बंजर भूमि पर
चमन फूलों का उगा लूंगी
मेहनत और अपने होंसलो से
एक नया आकाश बना लूंगी
माँ मैं तेरी बेटी हूँ
बेटी से डरना नहीं
वचन देना
कुछ नहीं चाहिए तेरी गुड़िया को
बस कोख में ना मरने देना ।
डॉ .विनोद कुमार


