ढूंढने निकला मैं जो एक सच्चा इंसान
मन्दिर ढूंढा मस्जिद ढूंढा
गिरजा ढूंढा और ढूंढा गुरुद्वारे
भगवान मिला कुछ शांत सा
मिले शास्त्रों के ज्ञाता बहोत
कुरान कठंस्थ मौलवी
शब्द गुरबानी के सुनाते ग्रन्थी
बाईबल रटवाते पादरी
धर्म के ठेकेदार भी देखे
साधू संतो के बाजार भी देखे
जात पात पर लडने वाले
बुद्धिजिवी बहोत महान भी देखे
मुखौटा लगा के राम का
हर नुक्कड़ पर रावण देखा
मानव और दानव के बीच की
देखी है टूटते हमने रेखा
दाडी बढा मीठी बातो में फुसला
बनते देखे ढोंगी भगवान
पर मिला नहीं ढूंढे से भी
अब तक केवल एक सच्चा इंसान ।
डॉ .विनोद कुमार


