
ना ना ना आंखे ना चुराओ
मैं कोई गंदा नाला नहीं
मैं तो पवित्र गंगा हूं
शरमाये क्यूं लम्बा तिलक लगा के
बलात्कार किया मेरी ही अस्मत का
माँ मुझको अपना भगवान बना के
ये कैसी श्रद्धा और पुजा
पापी हो गये पवित्र नहा के
गंगा माँ कहते किस मुंह से
गंगा को एक नाला बना के
पाप धोकर अपने अपने
क्या कभी किसी ने
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