धन धन धन धनतेरस आया

माँ सरस्वती ने हिसाब लगाया

कलम निकाल लिख एक पत्रे पर

माँ लक्ष्मी पर तकडा़ टैक्स लगाया

देख अठाईस प्रतिशत कर

माँ लक्ष्मी लगी थोडी घबराई

कैसे बच्चो को दे सोने के सिक्के

आभूषण कपडे और मिठाई

धनतेरस पर मोटा लाला

आज भी हमने हंसते पाया

गरीब के आंगन में देखा अंधेरा

थाली से निवाला गायब पाया

शिक्षा से वंचित बेचारा गरीब

कैसे पूजे मां सरस्वती

किताब ले भला हाथ में कैसे

पेट में ज्वाला सी आग लगी

धन धन धन धनतेरस आया

सब नया नया लगने लगा

गरीब रामलाल नम आंखों से

धनतेरस को तकने लगा

ना चाहे वो कोई धन दौलत

ना चाहे वो तो कोई खजाने

मिल जाये बच्चो को एक वक़्त की रोटी

तन ढकने को बस कपडे पुराने

आओ धनतेरस दिवाली

मिलकर कुछ ऐसे मनाये

रोती आंखो से पोछें आंसू

कुछ मुस्कान गरीबों के नाम करें

दीप जलाकर प्यार के

अंधियारे कुछ आंगन के दूर करें ।

डाँ.विनोद कुमार