कोई तो बात करता बढ़ते भ्रष्टाचारों की

कोई तो बात करता मरते वीर जवानों की

कोई तो बात करता बढ़ते बेरोजगारों की

कोई तो बात करता बढ़ते बलात्कारों की

कोई तो बात करता फांसी पर लटके किसान की कोई तो बात करता स्वास्थ्य के आभाव की

कोई तो बात करता शिक्षा के गिरते स्तर की

कोई तो बात करता मरते भाईचारे की

कोई तो बात करता मेरे भारत की शान की

कोई तो बात करता तिरंगे की आन की

कोई तो बात करता लुप्त होती नदियों की

कोई तो बात करता बंजर होती धरती की

कोई तो बात करता देश में होती दहशतगर्दी की

क्यू बात मेरे देश में

केवल राम और अल्हा की होती है

गरीब रामू की अब्दुल की नहीं होती

क्यू बात केवल गांय के आदर की होती है

नारी की इज्जत की नहीं होती

क्यू बात देश में केवल

56 इंच की छाती की होती है

भूख से सूखी बच्चों की पसलियों की नहीं होती

क्यू बात पप्पू की आंख मारने की होती है

निर्दोष इंसा मारे जाते धर्म जात के नाम पर

क्यूं बाते उसकी नहीं होती

क्यूं बातें केवल बढते इंडिया की होती है

रोते गरीब भारत की नहीं होती

कुछ नहीं कोई हमदर्द नहीं

यहां सब सियासत है

झप्पी हो या लम्बे लच्छेदार भाषण

नेता गिरगिट के वंशज हैं

ये आंसू भी बेचेंगे

मुस्कान भी बेचेंगे

देशभक्ति बेचेंगे

जिंदा और मर चुके इंसान बेचेंगे

धर्म बेचेंगे जात बेचेंगे

रिश्ते बेचेंगे ईमान बेचेंगे

सत्ता की लिए मार देंगे ये इंसानियत

ये मौत का सारा सामान बेचेंगे । 

डॉ .विनोद कुमार