ना बहा आँसू दुनिया के आगे
दुनिया है ये पत्थर की
अश्कों को तेरे क्या समझेगी
सटकेगी आंसू आँख मूंदकर
तुझे बद से बदतर कर देगी
आँसू थामकर आँखों में अपनी
फौलाद खुद को बनाना होगा
लेकर दिल में तूफानी हौंसला
तुझे है लड़ते जाना होगा
चीर कर चट्टान की छाती
रास्ता खुद बनाना होगा ।
डॉ .विनोद कुमार


