आयतें पढ़ डालीं कुरान की सारी

गीता का ज्ञान भी कंठस्थ कर डाला

बाईबल भी याद है यूं तो पूरी

शबद गुरु ग्रंथ के जहन में हैं सारे

भगवान ढूंढने चला था

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे में

मक्का मदिना और बडे़ बड़े शिवाले में

मगर भगवान नहीं पाया

पाखंड किया ता उम्र भगवान पाने का

इंसानियत अपनाई

ना इंसान बन पाया

पैसे से खरीदना चाहा भगवान को

मां बाप को टुकडे टुकडे को तडपाया

हर कोई आज डूबा पांखड में

जिसने भी पूजा बस पत्थर को पूजा

भक्ति का अजीब आडम्बर कैसा

प्यार हुआ छोटा

पैसा बडा हुआ है

मंदिर तो जोड़ा

घर को है तोड़ा

अश्कों का सागर छोड़ा

अंखियों में माँ बाप की

अकेला तडपता वीरान कमरों में छोड़ा ।

डाँ. विनोद कुमार