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बचपन तेरा मेरा


आ उतर आसमान से जमीन परआज खुद से मिलते हैं

उतार चोला बड़पन की बंदिशों काआ बचपन से अपने गुफ्तगू करते हैं ।

— डॉ. विनोद कुमार
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