इस वीरान बस्ती में बसेरा कहाँ होता है

बग़ैर आपके हमारा सवेरा कहाँ होता है


क्या कुछ नहीं करते लोग दौलत के वास्ते

मगर बस दौलत से ही गुज़ारा कहाँ होता है


आप ही को देख कर हम जी रहे हैं मानिए

सूरत किसी और का गवारा कहाँ होता है


आपके दीदार के लिए भटक रहे हैं कब से

बिना मंज़िल के कोई आवारा कहाँ होता है


बग़ैर आपके हम ख़ुद से भी नाराज़ रहते हैं

साथ आपके ये दिल बेसहारा कहाँ होता है

~विनीत सिंह

Vinit Singh Shayar