हम जो हैं कमरे के अंदर , बाहर भी वही हैं

आख़िर ये शर्म क्या है , ये हया क्या है


सौदा हुआ है दिल के बदले हमारे दिल का

आख़िर ये अहसान क्या है , ये दया क्या है


अगर देना पड़ा ज़ान इश्क़ में वो भी दे देंगे

दे देते हैं प्यार करने वाले इसमें नया क्या है


वो जा चुके हैं मीलों दूर और दिल धड़क रहा है

धड़क रहा है यहाँ तो फिर साथ गया क्या है

~ विनीत सिंह

VINIT SINGH SHAYARI