रोने वालो से कहो आवाज थोड़ी ऊंची कर ले

मेरा जनाजा कंधो पे उठाया जा रहा है अब


जीते जी तो मुझे भरपेट कुछ नसीब ना हुआ

मगर दावत पे जलेबी लुटाया जा रहा है अब

~ विनीत


विनीत सिंह शायर