उमर सोरह में लगइलू आग पानी में

और तबाही मचइलू जिंदगानी में


हँसेलु क के तू बरबाद लरिका के

मारबू कतना के चढ़ल जवानी में


बिजुरी से तोहर केहू ना बच पाए

रहेलू तू शायद एही पलानी में


महल शोहरत तोहर तोहरे मुबारक बा

जिनगी कटता इहवा दलानी में


लोग मुड़ मुड़ के तोहके देखे लागल

पहिर चल लू जब कुर्ती आसमानी में


राह रह रह के बदलल ठीक ना होला

आइल बा मोड़ फेर तोहर कहानी में


~विनीत सिंह