कतार में बड़े बड़े लोग हैं विनीत

यहाँ दाल नहीं गलने वाला तेरा

तू समेट ले अपना बोरिया बिस्तर

यहाँ बस नहीं चलने वाला तेरा

~विनीत सिंह


Vinit Singh Poet/shayar