सरेआम हो जाएगी रुसवाई एक दिन

मुझको न मार डाले तन्हाई एक दिन


देखकर आँखें उसकी बोलते थे हम

तुझको न ले डूबे ये गहराई एक दिन


उम्मीद ने रखा है अब तक जिंदा मुझको

लौट के आएगा वो हरजाई एक दिन


मेहरबान था कभी हम पर ये ज़माना

फिर साथ छोड़ गई परछाई एक दिन


यही इक बात रात भर मुझे सोने नहीं देती

गर बज उठे घर उसके शहनाई एक दिन


~विनीत सिंह