यकीन करना कितना मुश्किल होता है
कि महान शख्सियत कभी आम भी रही होगी
मेरी मां कभी बच्ची भी रही होगी
शहर बसने से पहले लहलहाते खेत रहे होंगे
पेड़ कभी छोटा सा पौधा रहा होगा
आज का सबसे बड़ा आविष्कार
केवल एक ख्याल भर रहा होगा
ऐसे ही शायद किसी को यकीन नही आएगा
मैं कभी तुम्हारे बेगैर रहा हूंगा।
