एक बार तो मिलना था

शायद वो बातें ही करने के लिए

जो अधूरी रह गयी थी

शायद एक बार फिर से

तुम्हे देखने के लिए

तुम आज भी वैसी ही

दिखती होगी मैं जानता हूँ

पर ये सब इन 

आँखों को समझाने के लिए

एक बार तो मिलना था।


तुम्हारे वो ख़त भी लौटाने थे

जो बहुत जल्दबाज़ी में लिखे थे तुमने

बहुत जताने की कोशिश की थी

तुम्हे वो यादें भी लौटानी थी

जो ना चाहते हुए भी बन गयी थी

तुम्हे एक बार तो मिलना था।


कुछ और भी बताना था

कि कैसे गुज़रा मेरे वक़्त का फ़साना था

कब तक तुम हाथ पकड़ कर साथ चली मेरा

किस मोड़ पर चल कर सब छूट गया

कितना प्यार करते थे हम शायद 

वो वक़्त भी तुम्हारे हाथ के साथ पीछे छूट गया

ये सब बताने के लिए

एक बार तो मिलना था।


वो शाम को हम-तुम पार्क की बेंच पर बैठते थे

तुम मेरे काँधे पर सर रखकर

हाथों की लकीरों में शायद 

ख़ुद को खोजती थी

शायद मिल गया है मुझे जवाब

ये बताने के लिए तो मिलना था।


वो बारिश में जब तुम भीगती हुई आयी थी

बूँदें चेहरे पर मोतियों सी सजाई थी

कुछ बूँदें फिसल आयी थी मेरे चेहरे पर भी

जब तुमने अपनी जुल्फें सहलाई थी

वो बूँदें लौटाने के लिए

एक बार तो मिलना था।  


मेरे हिस्से में तो बहुत

आँसू आये थे तन्हाई भी

तुम्हे तो लगता है 

ना आयी मेरी याद भी

पर अगर फिर आये हो

कुछ लम्हे तुम्हे भी याद

तो वक़्त अब ना ही करना

तुम ऐसे बर्बाद

और भी इकट्ठा करना 

जो तुम्हें भी मुझे लौटाना था

तुम्हे एक बार तो मिलना था।