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नींदों का कत्ल


नींदों का कत्ल कर रहा हूं आज कल मैं,मैं जी रहा हूं जैसे वैसे वैसे कत्ल कर रहा हूं!शागिर्द नहीं उसका आज मैं,जिस तरह नींदों का कत्ल कर रहा हूं!© विनीतशंकर

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