उद्यम की सौगात दिए,
यादों की पूंजी हाथ लिए,
था कितनी रातों से जाग रहा,
आस पुकार की साध रहा l
हाथों में पुरुषार्थ लिए,
जीवन को भावार्थ दिए,
था हौंसलों से दूरी माप रहा,
जन्मभूमी को जाप रहा।
थक बारी का इंतजार किए,
ना उम्मीदी का घूंट पीए,
अब देखो निशंक हो भाग रहा,
राह हर डग में नाप रहा ॥

