चाय की एक एक घूँट के साथ, बारिश की महसूसगी में,

जहाँ किताबों से उतरती हो तुम और जहाँ मिलता हूँ मैं तुमसे!

यकीन करो! वहीं मिलते है समन्दर और आकाश!


- विनय एस तिवारी