ए जिन्दगी तू बिकी तो हम बाजार हो गए।इतनी ठोकरें दी तुमने की समझदार हो गए।तेरे दिए हुवे हर दर्द अब तो दुआ मांगते हैं।दुवाओं के लिए ही तो हम वफादार हो गए।कवि विनय कुमार पाण्डेय "अजय "
ए जिन्दगी तू बिकी तो हम बाजार हो गए।इतनी ठोकरें दी तुमने की समझदार हो गए।
तेरे दिए हुवे हर दर्द अब तो दुआ मांगते हैं।दुवाओं के लिए ही तो हम वफादार हो गए।
कवि विनय कुमार पाण्डेय "अजय "