विश्वास ■■■■■■ लक्ष्य कितना भी बड़ा, अनभ्यस्त पर्वत सा खड़ा, समझो तुम्हारे पास है, खुद पर अगर विश्वास है ।।
निराश्रयता से घिरे, हर चेष्ठा पर तुम गिरे, कितनी भी आयीं आँधियाँ, सौ बार तुम टूटे जुड़े, फिर भी नही विचलित हुए, मंज़िल तुम्हारी दास है, खुद पर अगर विश्वास है ।।
कष्ट में रोया नही, अक्लांत तू सोया नही, दुविधाओं से दो हाथ कर भी, मार्ग तू खोया नही, तो साक्षी है यह धरा, करता नमन इतिहास है, खुद पर अगर विश्वास है।।।


