क्या यही तुम्हारी महानता , क्या इसपर गर्व करूँगा मै? देश के लिए मारूँगा या, जीने के लिए लड़ूंगा मैं?

इक खाता है दस भूखे हैं, इक जुड़ता  है दस टूटे हैं, हर ओर लगी छीना झपटी, बेखौफ घूमता है कपटी, बस अंधी नकल विदेशों की, अंधा विकास नीयत गंदी. नेताओ के बस पंगे है, वो हावी है जो नंगे है..

लोकतंत्र का नाटक है, "सबका शासन" नौटंकी है. सामंतों की पंचायत में, बस जनता ही अधनंगी है..

बस संविधान के रागों  पर, केवल जनता के ठुमके हैं, उनके अपने क़ानून नियम, जो संविधान को गढ़ते हैं..

सौ ह्रासित हैं इक संचित है, जीवन गरिमा से वंचित है. बच्चे नंगे हैं सर्दी में, कुछ राज छुपे हमदर्दी में..

अन्नदाता यहां पर भूखा है, आँखों का पानी सूखा है, सुन्दर अतीत की चर्चा है, भावी विनाश पर खर्चा है..

साँसों में उनके जहर भरा, जो बस जीने को खाते हैं, जो उगल रहे हैं धुआं कभी, शायद ही बाहर आते हैं..

सीमाओ पर जिसकी कितने सैनिक हंस जान लुटाते हैं कुछ चंद कमीने यहां बैठ कर अपना गाल बजाते हैं..

जो पढ़कर मंगल से आया, वह शिक्षा नीति बनाता है, खुद अपने बच्चों को बाहर , वह इंग्लिश फ्रेंच पढ़ाता है..

जो जितनी भींड़ जुटा लेता, उतना महान कहलाता है, जो बात वसूलों की करता, वह चिल्लाकर मर जाता है..

औरत पर दर्शन बड़े बड़े, पर केवल गयी सताई है, घर घर लूटी मारी कुचली, आये दिन  गयी जलाई है..

बातो में सब गुमराह किसे, मिलना बाकि है आरक्षण, महिलाओं पर कुछ बात नही, सदियों से घर घर में शोषण ..

सब चोर उ्चक्के दुश्चरित्र, उपरवाले की मोहर पर, संयमी श्रमी सज्जन सीधा, हरदम रहता है डर डर कर..

थाने विद्यालय अस्पताल, अधिकांश लूट  के अड्डे हैं, सत्तर सालों की आज़ादी, सड़को में अब भी  गड्ढे है..

जिसके शरीर और पाकेट में, जितनी ही ज्यादा गर्मी है, उसकी ही बातों में दम है, बाकी सब बातें फ़र्ज़ी है..

जल्लाद बैठ कर कमरे में, डूबे  अपनी रेड वाइन में, बेचारा थर थर कॉप रहा, मजदूर खड़ा है लाइन में..

साहब है जिम्मेदारी में, मीटिंग सारी फुलवारी में, शेल्फी हर दुख पर भारी है, तबतो सरकार हमारी है..

सब आंख गड़ाए बैठे है, किस्से है उधर जवानी के, रोता किसान मरता गरीब, लाले है राशन पानी के..

इसका विकास ये ही जाने, ये तो गरीब बेचारा है, बच्चे की फीस जुटाने में, भी फिरता मारा मारा है..

आखिर एक दिन इसकी भी , हिम्मत स्वयं पस्त हो जाएगी, ये सबका पेट भरेगा या फिर, मौत इसे भी आएगी..

इस तुक्ष राकछसी दंगल में, किसकी जयकार करूँगा मैं, क्या इसपर गर्व करूँगा मैं ??