एक मासूम सी लड़की, मेरे ख्वाबों में आती है, देख कर मुझको अपनेपन से खिलखिलाती है। जाने क्या है रिश्ता उससे, मन में संशय पूछूँ किससे..? कुछ छड़ पीछे मुड़कर अदा दिखलाती है, जिद्दी है वो कभी-कभी तो डाँट लगाती है। कुछ बातों को मुस्कुरा कर टाल ही जाती है, एक मासूम सी लड़की मेरे ख्वाबों में आती है..। सपनों की अकेली राहों में हाथ बढ़ाती है, पनघट की वो पनिहारन सी चलती जाती है। भीड़ में जब भी शामिल होता, खो ही जाती है.. एक मासूम सी लड़की मेरे ख्वाबों में आती है..। सोचता हूँ सो लूँ क्षण भर, अपना है अधिकार ही किस पर.? नीदों में आकर प्यार से मुझको थपथपाती है, फिर धीरे-धीरे कानों में, मिलन के गीत सुनाती है। बाहों में भर कर, नवजीवन के स्वप्न दिखलाती है, एक मासूम सी लड़की मेरे ख्वाबों में आती है...!