
हमारे खाब हम नही बुन रहे
किसी का व्यक्तिगत फैसला
या व्यक्तिगत हार हमारा पीछा कर रही है
हर दम हर वक़्त।
हमारी हर मांग को अधूरा सा पूरा करने की शर्त हमे अक्सर बताती है , हमारे असली सपने गलत है।
पापा के घर आते ही,
भाग कर टी.वी न बन्द करना ,
गलत है।
घर में आये मेहमानों के सामने ,
ज़ोर से हँस देना गलत है।
गलत है खुद के ख़्वाबो को,
पुरा करने के ख्वाब देखना।
और गलत है आइ.आइ.टी के
अलावा कुछ और सोचना।
सौरभ तुम लड़के हो
तुम्हारा सफल ना होना तो गलत है ही
रोना भी गलत है।
सोनी तुम लड़की हो
तुम्हारा
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