मैं वोट से पहले पैर दबाऊँ,
मैं चाचा को पौआ दिलाऊँ,
मैं जीत के बाद हाथ न आऊँ,
मैं ‘चाचा कौन?’ ये बोल के जाऊँ!

मेरी मर्ज़ी! अरे भाई, मेरी मर्ज़ी!

मैं जनता का सेवक कहलाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं सेवक के दस नौकर रखवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं अफ़सर से जूते चटवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं जनता को चिंता में डालूँ - मेरी मर्ज़ी!

मैं रात को पर्चे बिकवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं सुबह परीक्षा रुकवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं फिर से फ़ॉर्म भरवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं उम्र निकलने दूँ, सब्र सिखाऊँ - मेरी मर्ज़ी!

मैं बच्चों की दाल पतली करवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं बिल में काजू-बादाम चढ़ाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं अस्पताल में फोटो लगवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं खाँसू तो विदेश उड़ जाऊँ - मेरी मर्ज़ी!

मैं सरकारी स्कूल को मंदिर बुलवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं बेटे को विलायत पढ़ाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं बेरोज़गार से झंडा उठवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं बेटे को कुर्सी दिलवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!

मैं जात दिखाकर वोट बटोरूँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं धर्म के नाम पे लड़वाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं दूर खड़ा तमाशा देखूँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं फिर एकता दिवस मनाऊँ - मेरी मर्ज़ी!

कल जिसको मैं चोर बताऊँ, आज उसी को मंत्री बनाऊँ!
सब मिलके हम गाएँगे, इस देश को नोच के खाएँगे!

मेरी मर्ज़ी! अरे भैया, मेरी मर्ज़ी!

मैं चंदा लूँ, पर नाम छिपाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं अपनी जाँच ख़ुद करवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं टैक्स से काफ़िला सजाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं ग़रीब को त्याग सिखलाऊँ - मेरी मर्ज़ी!

मैं गाय का चारा ख़ुद चर जाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं खेल बजट में खेल दिखाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं पंद्रह लाख का जुमला दिखाऊँ - मेरी मर्ज़ी!
मैं एक का डबल बोतल करवाऊँ - मेरी मर्ज़ी!

मैं पाँच बरस फ़ोन न उठाऊँ, फिर चुनाव में घुटने पे आऊँ!
चाचा के फिर से पैर दबाऊँ, फिर से वही मुस्कान दिखाऊँ!

नारा नया मैं फिर लाऊँ!

जनता मालिक, मैं हूँ सेवक, मालिक बाहर-अंदर सेवक!

मेरी मर्ज़ी! अरे भाई, मेरी मर्ज़ी!

Inspired by the song “Meri Marzi” from the 1995 Bollywood film Gambler.