
लालटेन की रोशनी में पढ़ के मैंने I.A.S
बनते देखा है,
बिजली की चकाचौंध में मैंने बच्चे को
बिगड़ते देखा है,
जिनमे होती है हिम्मत उसको कुछ
कर गुजरते देखा है,
जिनको होती है दिक्कत उनको
हालात बदलते देखा है,
फूक-फूक के रखना कदम मेरे दोस्तों,
छिपकली से भी जयादा मैं
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