उनको छूने की तरकीबें
उनको पाने के मंसूबे,
सब इनके लिए हे आसां
पर मेरे लिए अजूबे!
जब देखूं उनको, तो ऐ दिन निकले
घर जाएं तो मेरा सूरज डूबे..
उनको छूने की तरकीबें..उनको पाने के मंसूबे...
बस उनकी आखें ही तो देखीं हैं, ना नाम पता है ना सूबे,
अब उनका ही है बनना...चाहे ये जिद मुझको ले डूबे।
उनको छूने की तरकीबें
उनको पाने के मंसूबे।।
