वजहें खोजती हो तुम कब कब कैसे कैसे है मिलना रिमझिम सुबहों रोशन शामों ओर मखमली रातों में मिलना कभी मिलना यहाँ कभी मिलना वहाँ मिलना ज़रूर आँखो में बातों में आहों में बाँहों में जज़्बातों में मिलना मिलने के बहाने मैं हज़ार दे दूँ अगर तू है तैयार उजले लफ़्ज़ों सच्ची बातों या फिर ख़ैरातों में मिलना संभाल लेंगे के अपने दिल को हम किसी भी तरह बनके शहनाई का दर्द तू हमें डोली और बरातों में मिलना