तंग आ चुके हम आप सबकी हिकमतों से
खुदा बचाए हमें रोज़ रोज़ नई आफ़तों से
कभी ये करता तहक़ीक़ात कभी वो करता
लड़ना आसान नहीं अब यहाँ हुकूमतों से
ख़ाली हाथ आए हो ख़ाली हाथ जाओगे
क्या किसी को मिला यहाँ बड़ी सल्तनतों से
क्या सोचा था और क्या मिला हमें यहाँ पर
नर्क हो गया सब रहा नहीं वास्ता जन्नतों से
कोई आवाज़ उठाए तो हश्र उसका ये होगा
कुछ तो डरो तुम भी यहाँ होने वाली बग़ावतों से
कब तक आख़िर कब तक सुने बस सुने उनकी
पेट की आग कहाँ बुझती है सिर्फ़ फ़लसफ़ो से
कोई बस हवा में ही है कोई जहाज़ जहाज़ कर रहा
हुआ ता है भला किसी न किसी का यहाँ रहमतों से
तंग आ चुके हम आप सबकी हिकमतों से
खुदा बचाए हमें रोज़ रोज़ नई आफ़तों से
कभी ये करता तहक़ीक़ात कभी वो करता
लड़ना आसान नहीं अब यहाँ हुकूमतों से