सोचते थे ............सोचते हैं
जब कागज़ की किश्ती बनाते थे
तब बड़े जहाज में बैठेने के बारे में नहीं सोचते थे
और आज जब बड़े ज़हाज मैं बैठे हैं तो
अब उन कागज़ की किश्तियों के बारे में सोचते हैं
जब दोस्त बनाया करते थे
तब दुश्मनों के बारे में नहीं सोचते थे
और आज जब चारो तरफ दुश्मन ही दुश्मन हैं तो
अब उन दोस्तों के बारे में सोचते हैं
जब दिन सब के साथ हंसी ख़ुशी गुजरते थे
तब दुःख गम आंसुओं के बारे में नहीं सोचते थे
और आज कल सब कुछ मेरे पास तो
अब उन दिनों और हंसी खुशियों के बारे मैं सोचते हैं
जब खाना माँ के हाथ से खाते थे
तब स्वाद पसंद के बारे में नहीं सोचते थे
और आज पाँच सितारा होटल में होते हैं तो
अब उन स्वादों और माँ के हाथ के बारे में सोचते हैं
जब बचपन था तो किसी से नहीं डरते थे
मार पिटाई डर के बारे में नहीं सोचते थे
और आज हम बड़े हो गए हैं तो
अब उन मार पिटाई और डर के बारे में सोचते हैं
जब समय था सब कुछ करते थे
वक़्त कटता था पता नहीं चलता था
और आज समय ही नहीं मिलता है तो
अब उन लम्हों और वक़्त के बारे में सोचते हैं