सोचता हूँ तो मजबूर हो जाता हूँ
मैं सच से, सच्चाई से दूर हो जाता हूँ
जादू तो अकसर चलता है शब्दों का
मैं तो बस यूँ ही मशहूर हो जाता हूँ
देते हैं लोग मुद्दा मुझे लिखने का
मैं तो काग़ज़, क़लम का ग़रूर हो जाता हूँ
कहते हैं नशा जैसा भी हो उतर जाता
मैं उतरता नहीं वो सरूर हो जाता हूँ
तारिफ के क़ाबिल मैं नहीं बिलकुल भी
मैं पल में आता पसंद वाह हुज़ूर हो जाता हूँ
लोग लेने लगते हैं बलायें मेरी सर अपने
मैं कभी चाँद, तारा, आँखो का नूर हो जाता हूँ
सोचता हूँ तो मजबूर हो जाता हूँ
मैं सच से, सच्चाई से दूर हो जाता हूँ