रखा बर्तन में भरके पानी अपनी मुँडेर पे
पक्षी बनके मेहमान शुरू आने जाने हो गये
सुना है बना लिये दोस्तों ने कुछ दोस्त नये
हमने पूछा तो बोले वो तुम पुराने हो गये
कभी नहाया करते थे नंगे हम जिस बरामदे में
समय की मार में किसी और के आशियाने हो गये
कागज़ के टुकड़ों से कभी एेसी यारी न थी हमारी
चलती जहाँ हुकूमत इनकी हमारे ठिकाने हो गये
हमें तो जलना ही था बचना कौन चाहता था
हम आज शमा पे जलने वाले परवाने हो गये
बचा के रखी है वो रेज़गारी बचपन की सब
वो तो दिखाने को हम आज सयाने हो गये