जो करना चाहता खत्म मोहब्बत तेरी वो क़ातिल कौन है दोस्तों से तो उम्मींद नहीं, दुश्मनों में शामिल कौन है ग़म ही ग़म है जिधर देखो न बची बस्ती न गाँव कोई जो बच सके दुखों और ग़म से ऐसा क़ामिल कौन है अपनों से अपने दूर हो गये पापी पेट की ख़ातिर ख़ुद कर दे कश्तियों को दूर खुद से ऐसा साहिल कौन है जलते देखा मैंने जमानें को दूसरे की खुशियाँ देखकर हो ख़ुश खुद वो देखकर खुशियाँ किसी और की ऐसा फ़ाज़िल कौन है सच डरता है और खड़ा रहता कटघरे में हरदम यंहा दिला के शह और मात झूठ को जिताये सच, ऐसा आदिल कौन है हमारे हैं सब रिश्ते नाते रस्मों रिवाज़ हमने बनाये निभा के दिखाये कोई सभी एक साथ ऐसा ग़ाफ़िल कौन है हाँ बने हम बुद्धू और उल्लू जो जमानें नें बनाया हमे जो बच सके जमाने के पैतरों से, ऐसा आक़िल कौन है हमने तो मनवाया लोहा अपना अपनी क़ाबिलियत से देखना है अब यंहा हमसे बड़ा क़ाबिल कौन है