फर्क नहीं पड़ता
चिराग तो अपनी मर्ज़ी से
जलता है
उसे हवा की रफ्तार से फर्क
नहीं पड़ता
शेर अपनी चाल से चलता है
उसे गीदड़ों की हुंकार से फर्क
नहीं पड़ता
अच्छे तो बस अच्छे ही रहता है
उसे बुरो के बुरे व्यवहार से फर्क
नहीं पड़ता
सचा दोस्त तो सचा दोस्त
ही रहता है
उसे अफवाहों के बाज़ार से फर्क
नहीं पड़ता
प्यार सचा कभी भी कम
नहीं होता है
उसे थोड़े से इंतज़ार से फर्क
नहीं पड़ता
वो जैसा है वैसा ही खुश है बहुत
उसे तुम्हारे ख्याल और विचार से
फर्क नहीं पड़ता
ख़ूबसूरती देखने वाले के आँखों में
होती है
उसे किसी के साजो श्रृंगार से
फर्क नहीं पड़ता
ईमानदारी की कोई किम्मत
नहीं होती बिकाऊ वो
उसे किसी के
करोड़ों लाखों या हज़ार से फर्क
नहीं पड़ता