पल पल का हिसाब मैं दूँगा मुद्दा तू दे मुंझे जवाब मैं दूँगा नींद तू दे दे मुझे बस इतनी क़सम से तूझे ख़्वाब मैं दूँगा हुस्न तो है ही तेरे पास ज़ालिम उसपे थोड़ा और शवाब मैं दूँगा तू तो बस रखना तैयार किताब छुपाने को उसमें गुलाब मैं दूँगा कुछ तो तू बस बोलने को हो तैयार तुझे बोलने को अल्फ़ाज़ मैं दूँगा तू बस क़ायम रहना अपनी बात पे वादे निभानें का रिवाज मैं दूँगा इश्क़ है अगर तुझे मुझसे तो मोहब्बत को अंदाज मैं दूँगा