मुझे तू इस क़दर अपने क़रीब लगता है तूझे अलग से जो सोचूं तो अजीब लगता है मुझे ये नहीं लगता कि मिलेगा तू मुझे तू मुझे किसी और का नसीब लगता है कैसे मान लूँ कि तू है मेरा मुझे लगता नहीं तू मुझे अकसर मेरा रक़ीब लगता है मैंने तो पहली बार की मोहब्बत मुझे क्या मालूम पर तुझे सब पता है तू बड़ा अदीब लगता है मैं नहीं पा पाया तुझे तो रहा ख़ाली हाथ ज़िंदगी भर पर तू भी मुझे बहुत आज ग़रीब लगता है मुझे तू इस क़दर अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचूं तो अजीब लगता है