मैं जब भी तेरे ग़मों में डूब के लिखता हूँ
लोग कहते है ....वाह... क्या खूब लिखता हूँ ||
लिखता हूँ तेरी यादों के बारे में
लिखता हूँ तेरी बातों के बारे में
लिखता हूँ तेरे पास होने के बारे में
लिखता हूँ तेरे दूर होने के बारे नें
लिखता हूँ तेरे और अपने मजबूर होने के बारे में
कह दे कोई कि मैं झूठ लिखता हूँ
लोग कहते है ....वाह... क्या खूब लिखता हूँ ||
लिखता हूँ तेरे मेरे लफ़ड़ों के बारे में
लिखता हूँ तेरे मेरे झगड़ो के बारे में
लिखता हूँ वो घर से भाग जाने के बारे में
लिखता हूँ तेरा मुझे मनाने के बारे में
लिखता हूँ तेरे तिलमिलाने के बारे में
सही कहा किसी ने मैं अपना वजूद लिखता हूँ
लोग कहते है ....वाह... क्या खूब लिखता हूँ ||
लिखता हूँ शब्द तेरे और मेरे बारे में
लिखता हूँ कुछ बात सिर्फ़ इशारे में
लिखता हूँ ख़्वाब जो देखे थे साथ साथ
लिखता हूँ घूमते थे लिये हाथ में हाथ
लिखता हूँ क्यों हैं बदले बदले हालात
असल तो लिख चुका बहुत आज मैं सूद लिखता हूँ
लोग कहते है ....वाह... क्या खूब लिखता हूँ ||