कोई कह दे मौसम से यूँ ज़रा कि हमें वो इस क़दर न बहकाये जिन्हें भूल चूके हैं हम अब यहाँ करें याद, उन्हें हिचकी न आ जाये वो ना बरसा तब, जब ज़रूरत थी कह दो बादल से वो चला जाये चर्चे हर तरफ हो रहें हैं हमारे आज बैठे हैं घर में, कि बहार निकला न जाये नशा मौसम का चढ़ने न दूँगा मैं सर अपने गिरा जो एक बार फ़िल सँभला न जाये कोई कह दे मौसम से यूँ ज़रा कि हमें वो इस क़दर न बहकाये जिन्हें भूल चूके हैं हम अब यहाँ करें याद, उन्हें हिचकी न आ जाये