कर सको तो कर लो इस भीड़ की पहचान
इंसानों की भीड़ है और उसमें घिरा इंसान
जिधर देखो बस लगी है भीड़ बिन बात के
चुपके चुपके लेकर ज़िन्दगी कर रही काम
इकट्ठा हुई थी भीड़ देश की आज़ादी के लिये
आज होकर इकट्ठा ले रही है वो इंतक़ाम
कहने को तो ख़ाली हाथ होती है भीड़ यहाँ
पर लाठी, बंदूक़, आग, सब तैयार है सामान
भीड़ आती देश की सुरक्षा पर लेकर ख़तरा
खड़ा रहता निडर देश का हमारे वीर जवान
भीड़ का दिमांग नहीं फिर भी सोचती समझती
भीड़ की आड़ में चल रही जाने कितनी दुकान
गली, मोहल्लें, सड़के सब काँपते हैं भीड़ से
आती जब जब छोड़ जाती है अपने निशान
क़ानून कहता की करो उपाय की भीड़ न हो
कर रही विचार संसद सुनना चाहते सब फ़रमान
कर सको तो कर लो इस भीड़ की पहचान
इंसानों की भीड़ है और उसमें घिरा इंसान