जो कर दि मैनें ग़लतियाँ अब भला, उन्हें मैं उन्हें सुधारूँ तो सुधारूँ कैसे ! चल रहे थे साथ साथ हम बिछड़ गये, दोस्तों को अब पुकारूँ तो पुकारूँ कैसे ! लग गयी नज़र जैसे रिश्तों पे टोटके, नहीं मानता मैं नज़र उतारूँ तो उतारूँ कैसे ! बनाना चाहता ख़ुशहाल सबको उजड़ गया जो, अब उसे सँवारूँ तो सँवारूँ कैसे ! जिनके बिना कभी पल ना कटता था, आज उनके बैगेर ज़िंदगी मैं गुज़ारूँ तो गुज़ारूँ कैसे !