जो है मंज़िल तेरी, उसकी पहचान तो हो,
चलेगा तू तो सब चलेंगे, क़दमों के तेरे निशान तो हों,
माना पंख नहीं फिर भी उड़ जायेगा तू,
पर लायक तेरे ये आसमान तो हो,
उम्मींद से उम्मींद से जुड़ी है यहाँ,
किसी को साथ चलने का अरमान तो हो,
करेंगे याद तुझे वो सब जो चाहते हैं तूझे,
तू रहे याद तेरा उनके पास कुछ समान तो हो,
माना तू है तैयार हर समय जाने को सफ़र पे,
ठहर ज़रा सुन तो उसका तेरे लिये फ़रमान तो हो,
क्या क्या नहीं करा तूने नाम की ख़ातिर,
मिला होगा कुछ फल, अचछा अंजाम तो हो
जो है मंज़िल तेरी, उसकी पहचान तो हो,
चलेगा तू तो सब चलेंगे, क़दमों के तेरे निशान तो हों,