इंसान भी शैतानों की जात में आ गये अब तो शरीफ़ भी औक़ात में आ गये पता नहीं किया जुर्म हुआ था हमसे तभी ऐसे पड़ौसी सौग़ात में आ गये जो उठायेगा नज़र हमारे देश पर बचेगा नहीं फिर न कहना हम युद्ध के हालात में आ गये उल्लाह हाफ़िज़ हो उन मौत के सौदागरों का जो कर पार सरहद हमारी पनाह में आ गये माना शांति की करते पूजा हम, चाहते शांति चुभने लगे हो आप अब हमारी निगाह में आ गये करने के तो ये हम भी कर सकते थे बहुत पहले इंसान थे हम भी इंसानियत के जज़्बात में आ गये इंसान भी शैतानों की जात में आ गये अब तो शरीफ़ भी औक़ात में आ गये