है बहुत देर से चुप्पी अब ज़रा आवाज़ हो
अँधेरों का शहर अब तो सुबह का आगाज़ हो
कौन कहता है हवा पर पाँव रखा नहीं जा सकता
आसमाँ छूने का ये शायद मेरा अंदाज़ हो
बहुत दिनों से ये और वो करने की थी तमन्ना
जो दिल करना चाहे वो अभी और आज हो
जवानी में रोज़ करते हैं याद अपने बचपन को
बचपन जवानी के बाद फिर बचपन का रिवाज हो
सब कुछ किया बस अपने लिये अपने में रहे
करें कुछ उनके लिये तो उनको हमपे नाज हो
कौड़ीयां तो आख़िर में जायेंगी कौड़ीयों के भाव
दिलों में बसे तू और तू ही दिलों का सरताज हो