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है बहुत देर से चुप्पी अब ज़रा आवाज़ हो

है बहुत देर से चुप्पी अब ज़रा आवाज़ हो अँधेरों का शहर अब तो सुबह का आगाज़ हो कौन कहता है हवा पर पाँव रखा नहीं जा सकता आसमाँ छूने का ये शायद मेरा अंदाज़ हो बहुत दिनों से ये और वो करने की थी तमन्ना जो दिल करना चाहे वो अभी और आज हो जवानी मे
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