हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते है
हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते है
मिलना मिलाना चलता रहता है सियासत में
सुना है दुश्मनों से आजकल हमारे सनम मिलते हैं
करना है तो कर जा काम ऐसा कि याद रखे सब
खुदा की दुनियाँ में इंसान को जन्म कम मिलते हैं
वो भी घबरा जाता है मेरी तरह ज़रा ज़रा बात पर
गुण इस क़दर मिलते, कि दोनों के वहम मिलते हैं
हक़ की बात करो जो तो हक़ीक़त समाने आ जाती
करते काम हमारे अहसान दिखा हमें रहम मिलते हैं
चोट तो आसानी से मिल जाती है यहाँ कोशिश कर
बड़ी मुश्किल से मेरे यार यहाँ पर मरहम मिलते हैं
कभी ये तो कभी वो सियासत करवटें बदलती रहती
बदल जाते राजा बदले बदले रोज परचम मिलते हैं
हद से बढ़ जाये ताल्लुक तो ग़म मिलते है
हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते है