जो रिश्ता भगवान बनाना भूल गए
वो रिश्ता ख़ुद बनाते हैं हम
और सब पल दो पल का साथ इसे
ज़िंदगी भर निभाते हैं हम
और शर्त ना कोई माने जो उससे
सारी शर्त अपनी मनवाते हैं हम
और कोई जब आता नहीं बुलाने से
तो सिर्फ़ उसे ही बुलाते हैं हम
सुख दुःख रहता नहीं याद हमें
आंसुओं को नूर बनाते हैं हम
जाने क्या क्या खोना पड़ता है
तब जाके उसे पाते हैं हम
जब आती नहीं नींद हमें तो रात भर
उसी को जगाते हैं हम
हो चुके भले ही पुराने उसके किस्से
अपने बच्चों को सुनाते हैं हम
याद वो बहुत आता है आज भी
जाने कैसे अपने दिल को समझाते हैं हम
होने नहीं देते कभी उदास उसे
अपनी बेवकूफ़ी से उसे हंसाते हैं हम
सुन नहीं सकते उसके खिलाफ कुछ भी
अकसर उसकी ग़लती छुपाते हैं हम
अच्छे समय में रहते हैं सब
बुरे समय के लिए दोस्त बनाते हैं हम
ए दोस्त हो गए बहुत दिन मिले
आजा आजा तुझे बुलाते हैं हम