बिना जले अंधेरों से हिसाब नहीं होता
यूँ हीं कोई यहाँ चिराग़ नहीं होता
क़सीदे पढ़े जाते हैं चाँद की तारीफ़ में
सोचो अगर उसमें दाग़ नहीं होता
संगीत देता सकूँ रूह को जो बजाया जाये
सोचो अगर उसमें राग नहीं होता
जलाते हैं लोग बस्तियाँ पर बस्तियाँ यहाँ
पता नहीं क्यों नाम उनका आग नहीं होता
बिना जले अंधेरों से हिसाब नहीं होता
यूँ हीं कोई यहाँ चिराग़ नहीं होता