है बच्चों का दिन चलो पुराना इतवार मनाते हैं भूल चुके जिसे सब गुजरे बचपन को बुलाते हैं घुमते हैं मोगली के साथ जंगल और जाके महाभारत काल में समय का पहिया घूमाते हैं खट्टा मीठा था बहुत ये जो है ज़िन्दगी का सफ़र खिली सुबह सुरभि जैसी चित्रहार का आंनद उठाते हैं नीम के पेड़ के इर्द गिर्द भागते थे विक्रम बेताल कूर सिंह की कूरता से चलो चंद्रकांता को बचाते हैं होती थी बहुत बातें नुक्कड़ पे जुबान संभाल के स्टार ट्रैक कि थी ऊँची उड़ान उसमे सब को उड़ाते हैं पिंकी चम्पक राजन इकबाल कि अजब गजब दुनिया साबू की ताक़त और चाचा चौधरी का तेज़ दिमांग दिखाते हैं ठुमक ठुमक चलत राम चन्द्र गजब कि थी धुन लाके दाने आनार के मुसद्दी से सब नज़रें चुराते हैं वो पहली बार सेटलाइट टीवी पे ज़ी टीवी,एम टीवी और इ टीवी चलो आज अपने बच्चों की अपने बचपन से मुलाक़ात करवाते हैं है बच्चों का दिन चलो पुराना इतवार मनाते हैं भूल चुके जिसे सब गुजरे बचपन को बुलाते हैं