ये कैसी प्रजा, ये कैसा प्रजातन्त्र
मुश्किल में आ गया बेज़ुबान यंत्र
ख़ता आप की यंत्र की कोई ख़ता नहीं
किसको डाला, किसको मिला, पता नहीं
बात बात पे दलीलें, बात बात पे मसौदे
चुटकियों में हो जाते यहाँ करोड़ों के सौदे
आप से जब होता अलग आप का कोई
पर्दा उठता रहस्यों से जब जनता थी सोई
बस सफ़ाई में बोले ख़िलाफ़ मेरे ये षड्यंत्र
ये कैसी प्रजा, ये कैसा प्रजातन्त्र
मुश्किल में आ गया बेज़ुबान यंत्र
ये राजनिती की कीचड़ में किसका हाथ
शायद देखना था ये दिन मिली सौग़ात
खिला कमल तो साईकिल तमतमाई
हाथ रहा ख़ाली हाथी की जान पे बन आई
झाड़ू फिर गयी, रह गये धरे आप के अरमान
बुला लिया सबको सज़ा लिये साजों समान
आम से बने खास बुलाते हैं विशेष सत्र
ये कैसी प्रजा, ये कैसा प्रजातन्त्र
मुश्किल में आ गया बेज़ुबान यंत्र
राजनिती है अगर तो गंदा होना ज़रूरी है
क्या राजनिती में फैलानी गंदगी ज़रूरी है
राजनिती है भ्रष्ट या फिर भ्रष्ट हैं हम
सब सही,सब ग़लत, मन का है भ्रम
आप का तो पता नहीं क्या है कहानी
किसी को हो न हो हो रहे हम शरम से पानी पानी
खासों के पास चलेगा न अब आम आम का मंत्र
ये कैसी प्रजा, ये कैसा प्रजातन्त्र
मुश्किल में आ गया बेज़ुबान यंत्र