आजादी की लौ को जला के रखा है
हमने तिरंगा दिलों में बसा के रखा है
करते आभार सरहद पर खड़े जवान का
दुश्मनों की नज़र से हमें बचा के रखा है
हो गये क़ुर्बान वतन पर नमन शहीदों को
दुश्मनों को आज भी हिला के रखा है
खड़ा हो जाता हर शख़्स करता देश से प्यार
जन गण मन को लबों पर सजा के रखा है
पहुँच गये चाँद पर हम तरक़्क़ी ने भरी उड़ान
सपनों को किया पूरा हौसलों को उठा के रखा है
आजादी की लौ को जला के रखा है
हमने तिरंगा दिलों में बसा के रखा है